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आखिर क्यों मनाई जाती है हरियाली तीज? जानिए मां पार्वती के 108 वर्षों के तप और शिव संग दिव्य मिलन की कथा

 Written By: Laveena Sharma
 Published : Aug 15, 2026 06:16 am IST,  Updated : Aug 15, 2026 06:16 am IST

हरियाली तीज का पावन पर्व 15 अगस्त 2026 को यानी स्वतंत्रता दिवस के दिन मनाया जाएगा। यह पर्व शिव-पार्वती के पुनर्मिलन का प्रतीक माना जाता है। यहां आप जानेंगे इस पर्व की पौराणिक कथा।

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हरियाली तीज की कथा Image Source : INDIA TV

हरियाली तीज का पावन पर्व महिलाओं के लिए बेहद खास होता है। यह त्योहार नाग पंचमी से दो दिन पहले मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं व्रत रखती हैं और सोलह श्रृंगार कर माता पार्वती और भगवान शिव की विधि विधान पूजा करती हैं। इस दिन हरे रंग के कपड़े और हरी चूड़ियां पहनने का विशेष महत्व माना जाता है। यह पर्व पति-पत्नी के प्रेम, विश्वास और अटूट वैवाहिक संबंध का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार 108 वर्षों के कठोर तप के बाद भगवान शिव ने इसी दिन माता पार्वती को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया। चलिए जानते हैं इस पर्व की पौराणिक कथा।

हरियाली तीज की कथा

हरियाली तीज की पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त करना चाहती थी और इसका संकल्प उन्होंने बचपन में ही ले लिया था। जब माता पार्वती शादी योग्य हुईं तो उनके पिता ने उनकी शादी के लिए योग्य वर की तलाश करना शुरू कर दिया। एक दिन नारद मुनि माता पार्वती के घर पहुंचे और उन्होंने उनके पिता पर्वत राज हिमालय से माता का विवाह भगवान विष्णु से कराने की सलाह दी। हिमालय राज इस पर तुरंत तैयार हो गए। जब माता पार्वती को ये बात पता चली तो वो परेशान होकर भगवान शिव को पाने के लिए एकांत जंगल में जाकर कठोर तपस्या करने लगीं।

कहा जाता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए पूरे 108 वर्षों तक कठोर तपस्या की। माता पार्वती को पूरा विश्वास था कि उन्हें उनकी तपस्या का फल जरूर मिलेगा और 108 वर्षों के कठिन तप के बाद भगवान शिव ने माता पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार किया। ऐसी मान्यता है कि यह दिव्य मिलन श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हुआ था। कहते हैं उस दिन से इस दिन को हरियाली तीज के रूप में मनाया जाने लगा और महिलाएं इस दिन अपने पति की लंबी आयु और मनचाहे व्रत की प्राप्ति की कामना से व्रत रखने लगीं। लेकिन कई क्षेत्रों में महिलाएं हरियाली की जगह हरतालिका तीज पर व्रत रहती हैं। कुछ पौराणिक कथाओं अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती का मिलन भादो शुक्ल पक्ष की तृतीया के दिन हुआ था, जिसे हरतालिका तीज के नाम से जाना जाता है। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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